सही ज्ञान 

एक गांव मैं एक चोर रहता था वह चोरी करने मैं निपुण था परन्तु वह किसी भी साधु संत की बातो मैं नहीं आता था 

एक दिन चोर ने सोचा क्यों न राजा के महल मैं ही हाथ साफ़ कर दिया जाए और वह महल के अंदर घुस गया जैसे ही वह महल के अंदर गया तो उसने देखा की एक बहुत वड़े महात्मा का  प्रवचन चल रहा था परन्तु वह महात्मा की बातो मैं नहीं आता था इतना देख के वह  वंहा से भागने लगा भागते भागते जैसे ही वह भीड़ के निकट पहुंचा तो वह एक पत्थर के साथ टकरा कर गिर गया 

तभी महात्मा  जी  की अव्वाज़ उसके कानो मैं पड़ीं कही झूट नहीं बोलना चाहिए जिसका नमक खाओ उसका कभी बुरा मत करो 

वह इतना सुन के उठा फिर भी बह चोरी करने महल के अंदर चला गया जैसे ही वह महल के दरवार के निकट पहुंचा तो दरवान ने पूछा कौन हो तुम और महल मैं क्या कर रहे हो ?

इतना सुनते हो चोर को महात्मा का उपदेश याद आ गया "झूठ नहीं बोलना चाइये'' तत्प्श्चात चोर ने उत्तर दिया मैं "चोर हु इतना सुन के दरवारियो ने सोचा की कोई राजा को नौकर है और मज़ाक कर रहा है और उसे महल के अंदर जाने की आज्ञा मिल गई जैसे ही वह  अंदर की और गए तो वह एक कमरे मैं पहुंच गया और उसने देखा की बहुत सारे पैसे और सोने चांदी के आभूषण देखे और उसने फिर उनको एक थैले मैं डाल लिया और फिर वह दूसरे कमरे मैं गया और उसने वंहा देखा की उनके प्रकार का भोजन रखा था फिर वह खाने लग गया खाना खाने के बाद जब वह वंहा से चलने लगा तो उसको फिर महात्मा उपदेश याद आया  जिसका नमक  खाओ उसका बुरा मत सोचो  फिर उसने सोचा की खाने मैं नमक भी था अतः मुझे राजा का बुरा नहीं सोचना  चाहिए इतना सोच कर वह वंहा से चल पड़ा पेहरेदार फिर पूछा क्या हुआ चोरी क्यों नहीं की चोर ने कहा जिसका नमक खाओ उसके यंहा कभी चोरी नहीं करनी चाहिए  इसलिए सारा धन रसोई घर मैं ही छोड़ आया तभी रसोईये की आवाज़ आयी की चोर आया है चोर को पकड़ो तो दरवान ने उसे पकड़ लिया और राजा के सामने पेश कर दिया 

राजा के समक्ष चोर ने कहा के मैंने तो सत्य कहा महाराज के मैं चोर हु पर मैंने चोरी नहीं की और आपका भोजन खाया और उसने कहा की जिसका नामक खाओ वंहा चोरी नहीं करते अतः मैं सारा धन छोड़ कर भाग रहा था चोर के उत्तर से राजा अत्ति प्रसन हुआ और उसे अपने यंहा नौकरी दे दी राजमहल से घर जा कर चोर ने सोचा की महात्मा के उपदेश के कारन ही आज मुझे दरबार मैं नौकरी मिली है और जिंदगी मैं आगे बढ़ने की महान सोच 

इसलिए महात्माओ के प्रबचन से भी सभी का कल्याण होता है 

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