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आखरी क्यों मनाई जाती है नाग पंचमी    किसी नगर मैं एक किसान अपने परिवार सहित रहता था उसके तीन बच्चे दो लड़के और एक लकड़ी एक दिन जब वह खेत मैं  हल चला रहा था तो उसके हल मैं  नागिन के   विंधकर  तीन बच्चे मर गए बच्चो के मर जाने पर माँ नागिन विलाप करने लगी और फिर उसने अपने बच्चों को मारने वाले से बदला लेने का प्रण  किया  एक रात्रि को जब किसान अपने बच्चो के  सो रहा था तो नागिन ने किसान उसकी  पत्नी और उसके दोनों पुत्रो को डस लिया दूसरे दिन जब नागिन किसान की पुत्री को डसने आयी तो किसान कि उस कन्या ने डरकर नागिन के सामने दूध का कटोरा रख दिया  और हाथ जोड़कर क्षमा मांगने लगी उस दिन नाग पंचमी थी नागिन ने प्र्स्न होकर कन्या से वर मांगने को कहा लड़की जो आपके दवरा मेरे माता पिता और भाई डसे गए है वो जीवत  हो जाएं और तब नागिन ने बोला आज के दिन जो भी नागो की पूजा करेंगे  उसे नाग कभी न डसेंगे  और नागिन तथास्तु कहकर चली गई और किसान का परिवार जीवत हो गया उस दिन से नाग पंचमी को खेत मैं हल चलाना और साग काट...
                                                      सही ज्ञान  एक गांव मैं एक चोर रहता था वह चोरी करने मैं निपुण था परन्तु वह किसी भी साधु संत की बातो मैं नहीं आता था  एक दिन चोर ने सोचा क्यों न राजा के महल मैं ही हाथ साफ़ कर दिया जाए और वह महल के अंदर घुस गया जैसे ही वह महल के अंदर गया तो उसने देखा की एक बहुत वड़े महात्मा का  प्रवचन चल रहा था परन्तु वह महात्मा की बातो मैं नहीं आता था इतना देख के वह  वंहा से भागने लगा भागते भागते जैसे ही वह भीड़ के निकट पहुंचा तो वह एक पत्थर के साथ टकरा कर गिर गया  तभी महात्मा  जी  की अव्वाज़ उसके कानो मैं पड़ीं कही झूट नहीं बोलना चाहिए जिसका नमक खाओ उसका कभी बुरा मत करो  वह इतना सुन के उठा फिर भी बह चोरी करने महल के अंदर चला गया जैसे ही वह महल के दरवार के निकट पहुंचा तो दरवान ने पूछा कौन हो तुम और महल मैं क्या कर रहे हो ? इतना सुनते हो चोर को महात...
   रक्षक एवम सहायक  भगवान् इंद्र अपने भक्तो का रक्षक एवं सहायक मित्र है  धार्मिक ग्रन्थ के अनुसार देवराज इंद्र को भक्तो का सहायक भी कहा गया है क्यूंकि बिना पूजा अर्चना विजयलाभ असभम है इसलिए योद्धा  गण विजय के लिए और अपनी रक्षा के लिए भगवान् इंद्र का आबाहन करते है  इंद्र युद्ध मैं आनार्यो के विरुद्ध युद्ध मैं सहायता प्रदान करते है एतदर्थ वह वस्तुओं का हनन एवं अपने अपूजको व् विरोधियो का  है वह जिस प्रकार पर्सन होते है उसी प्रकार भक्तो को उसे कुश बना देता है उसके तद्गुण के प्रभाव से अश्र गो ग्राम एवं रथादि उसके वश मैं रहते है इस प्रकार वह निखिल विश्व का प्रतिनिधि है  देवता तक भी उसकी कृपा के पात्र है 
                                             इंद्र वत्रासुर युद्ध  यह पौराणिक कथा के अनुसार एक  कालकेय नाम का एक  राक्षक  था और सम्पूर्ण धरती और आकाश पर उसका आंतक था और वह राक्षक भयंकर जल वर्षा करता और उसके आंतक से बचने के लिए सभी देवताओ ने मिलकर सोचा की वत्रासुर का वध करना अब जरुरी हो गया है सारे देवता गण देवराज  इंद्र के पास गए और उन्होंने वत्रासुर के वध करने के लिए भगवान् इंद्र देव का आवाहन किया  सभी देवताओ ने सारा वर्तान्त देवराज इंद्र को बताया और फिर देवराज इंद्र और वत्रासुर का प्रलयकारी युद्ध हुआ अंत मैं देवराज इंद्र ने वत्रासुर पर विजयी पायी और वत्रासुर को मारकर वह बारिश के स्वामी बन गए उसके बाद से देवराज इंद्र वर्षा के स्वामी भी कहे जाने लगे  इसलिए देवराज इंद्र को वर्षा को स्वामी भी कहा जाता है 
                                                        सही ज्ञान  देवराज इंद्र और पहाड़ की  कहानी  एक पौराणिक धार्मिक ग्रन्थ के अनुसार एक जगह पर तीन पहाड़ थेः और वह तीनो एक साथ रहते थे एक बार देवराज इंद्र उनके पास गए और बोला  इस क्षेत्र मै कोई नहीं आता और मैं इस क्षेत्र का नाम रखना चाहता हु और मैं चाहता हु की तुम तीनो मैं से किसी एक का नाम रख दू  तो पहले पहाड़ ने बोला मैं यह चाहता हु की मैं सबसे ऊँचा दिखाई दू ताकि मैं सब को दूर से दिखाई दू  तो दूसरे पहाड़ ने बोला की मुझे हरा भरा कर दीजिये  ताकि लोग मेरी और आर्कर्षित हो जाये  तीसरे पहाड़ ने बोला की आप मेरी ऊंचाई को समतल कर दीजिये ताकि लोग यंहा पर रह सके और लोग यंहा पर खेती कर के अपना जीवन यापन कर सके  देवराज इंद्र ने तीनो पहाड़ो की बात सुन के उस समय वो वंहा से चले गए  लेकिन १ वर्ष होने के बाद देवराज इंद्र फिर से लोटे और दे...
भगवान् श्री इंद्र देव के चरित्र और कार्य    हिन्दू धर्म मै ३३ करोड़  देवताओं का वरण मिलता है और सभी देवताओ के कार्य अलग अलग है और भगवान् श्री इंद्र देव के जीवन से मनुष्य को शिक्षा मिलती है और भोग से योग की और कैसे चले वैसे तो भगवान् श्री इंद्र देव को देवताओ का राजा माना जाता है वही वर्षा पैदा करते है  और वही स्वर्ग पर राज करते है और बही बादलो के देवता है सफ़ेद हाथी पर सवार इंद्र का अस्त्र बज्र है इस वज्र से इंद्र मेघ और विजली को अपने तरीके से संचालित कर के शत्रुओं पर आघात करने की क्षमता रखते है  और इंद्र देव  आपार शक्तिशाली  देव है युद्ध मैं जाने से पहले जो भी प्राणी भगवान्  इन्दर देव   की पूजा अर्चना करते है वह युद्ध मै हमेशा विजयी बनते है 
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हिन्दू धर्म मै भगवान श्री इंद्र देव को देवताओं का राजा और स्वर्गलोक के अधिपति और बारिश का स्वामी कहा जाता है और इंद्र लोक के राजा भी कहते है।  Hindu Religion  Lord Indra Dev is the King of the Gods and Lord of Heaven as well as the Lord of the people and also called the king of indra lok....                                                                                      कोई भी मनुष्य जब अपने शरीर से प्राण छोड़ता है तो तो उसके कर्म  के अनुसार ही उसे दण्ड भोगने पड़ते है और उसे अपने कर्मों के अनुसार ही उसे स्वर्ग और नर्क प्राप्त होते है  अगर किसी मनुष्य को स्वर्ग लोक प्राप्तहोता है तो भगवान् श्री इंद्र देव उनके कर्मो के अनुसार ही उन्हें स्वर्ग लोक में आश्रय दिया जाता है इसलिए भगवान् श्री इंद्र देव को स्वर्ग लोक का देबता कहा जाता...