रक्षक एवम सहायक 

भगवान् इंद्र अपने भक्तो का रक्षक एवं सहायक मित्र है 

धार्मिक ग्रन्थ के अनुसार देवराज इंद्र को भक्तो का सहायक भी कहा गया है क्यूंकि बिना पूजा अर्चना विजयलाभ असभम है इसलिए योद्धा  गण विजय के लिए और अपनी रक्षा के लिए भगवान् इंद्र का आबाहन करते है 
इंद्र युद्ध मैं आनार्यो के विरुद्ध युद्ध मैं सहायता प्रदान करते है एतदर्थ वह वस्तुओं का हनन एवं अपने अपूजको व् विरोधियो का  है वह जिस प्रकार पर्सन होते है उसी प्रकार भक्तो को उसे कुश बना देता है उसके तद्गुण के प्रभाव से अश्र गो ग्राम एवं रथादि उसके वश मैं रहते है इस प्रकार वह निखिल विश्व का प्रतिनिधि है 

देवता तक भी उसकी कृपा के पात्र है 

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