सही ज्ञान एक गांव मैं एक चोर रहता था वह चोरी करने मैं निपुण था परन्तु वह किसी भी साधु संत की बातो मैं नहीं आता था एक दिन चोर ने सोचा क्यों न राजा के महल मैं ही हाथ साफ़ कर दिया जाए और वह महल के अंदर घुस गया जैसे ही वह महल के अंदर गया तो उसने देखा की एक बहुत वड़े महात्मा का प्रवचन चल रहा था परन्तु वह महात्मा की बातो मैं नहीं आता था इतना देख के वह वंहा से भागने लगा भागते भागते जैसे ही वह भीड़ के निकट पहुंचा तो वह एक पत्थर के साथ टकरा कर गिर गया तभी महात्मा जी की अव्वाज़ उसके कानो मैं पड़ीं कही झूट नहीं बोलना चाहिए जिसका नमक खाओ उसका कभी बुरा मत करो वह इतना सुन के उठा फिर भी बह चोरी करने महल के अंदर चला गया जैसे ही वह महल के दरवार के निकट पहुंचा तो दरवान ने पूछा कौन हो तुम और महल मैं क्या कर रहे हो ? इतना सुनते हो चोर को महात...
Posts
Showing posts from May, 2019
- Get link
- X
- Other Apps
रक्षक एवम सहायक भगवान् इंद्र अपने भक्तो का रक्षक एवं सहायक मित्र है धार्मिक ग्रन्थ के अनुसार देवराज इंद्र को भक्तो का सहायक भी कहा गया है क्यूंकि बिना पूजा अर्चना विजयलाभ असभम है इसलिए योद्धा गण विजय के लिए और अपनी रक्षा के लिए भगवान् इंद्र का आबाहन करते है इंद्र युद्ध मैं आनार्यो के विरुद्ध युद्ध मैं सहायता प्रदान करते है एतदर्थ वह वस्तुओं का हनन एवं अपने अपूजको व् विरोधियो का है वह जिस प्रकार पर्सन होते है उसी प्रकार भक्तो को उसे कुश बना देता है उसके तद्गुण के प्रभाव से अश्र गो ग्राम एवं रथादि उसके वश मैं रहते है इस प्रकार वह निखिल विश्व का प्रतिनिधि है देवता तक भी उसकी कृपा के पात्र है
- Get link
- X
- Other Apps
इंद्र वत्रासुर युद्ध यह पौराणिक कथा के अनुसार एक कालकेय नाम का एक राक्षक था और सम्पूर्ण धरती और आकाश पर उसका आंतक था और वह राक्षक भयंकर जल वर्षा करता और उसके आंतक से बचने के लिए सभी देवताओ ने मिलकर सोचा की वत्रासुर का वध करना अब जरुरी हो गया है सारे देवता गण देवराज इंद्र के पास गए और उन्होंने वत्रासुर के वध करने के लिए भगवान् इंद्र देव का आवाहन किया सभी देवताओ ने सारा वर्तान्त देवराज इंद्र को बताया और फिर देवराज इंद्र और वत्रासुर का प्रलयकारी युद्ध हुआ अंत मैं देवराज इंद्र ने वत्रासुर पर विजयी पायी और वत्रासुर को मारकर वह बारिश के स्वामी बन गए उसके बाद से देवराज इंद्र वर्षा के स्वामी भी कहे जाने लगे इसलिए देवराज इंद्र को वर्षा को स्वामी भी कहा जाता है