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Showing posts from May, 2019
                                                      सही ज्ञान  एक गांव मैं एक चोर रहता था वह चोरी करने मैं निपुण था परन्तु वह किसी भी साधु संत की बातो मैं नहीं आता था  एक दिन चोर ने सोचा क्यों न राजा के महल मैं ही हाथ साफ़ कर दिया जाए और वह महल के अंदर घुस गया जैसे ही वह महल के अंदर गया तो उसने देखा की एक बहुत वड़े महात्मा का  प्रवचन चल रहा था परन्तु वह महात्मा की बातो मैं नहीं आता था इतना देख के वह  वंहा से भागने लगा भागते भागते जैसे ही वह भीड़ के निकट पहुंचा तो वह एक पत्थर के साथ टकरा कर गिर गया  तभी महात्मा  जी  की अव्वाज़ उसके कानो मैं पड़ीं कही झूट नहीं बोलना चाहिए जिसका नमक खाओ उसका कभी बुरा मत करो  वह इतना सुन के उठा फिर भी बह चोरी करने महल के अंदर चला गया जैसे ही वह महल के दरवार के निकट पहुंचा तो दरवान ने पूछा कौन हो तुम और महल मैं क्या कर रहे हो ? इतना सुनते हो चोर को महात...
   रक्षक एवम सहायक  भगवान् इंद्र अपने भक्तो का रक्षक एवं सहायक मित्र है  धार्मिक ग्रन्थ के अनुसार देवराज इंद्र को भक्तो का सहायक भी कहा गया है क्यूंकि बिना पूजा अर्चना विजयलाभ असभम है इसलिए योद्धा  गण विजय के लिए और अपनी रक्षा के लिए भगवान् इंद्र का आबाहन करते है  इंद्र युद्ध मैं आनार्यो के विरुद्ध युद्ध मैं सहायता प्रदान करते है एतदर्थ वह वस्तुओं का हनन एवं अपने अपूजको व् विरोधियो का  है वह जिस प्रकार पर्सन होते है उसी प्रकार भक्तो को उसे कुश बना देता है उसके तद्गुण के प्रभाव से अश्र गो ग्राम एवं रथादि उसके वश मैं रहते है इस प्रकार वह निखिल विश्व का प्रतिनिधि है  देवता तक भी उसकी कृपा के पात्र है 
                                             इंद्र वत्रासुर युद्ध  यह पौराणिक कथा के अनुसार एक  कालकेय नाम का एक  राक्षक  था और सम्पूर्ण धरती और आकाश पर उसका आंतक था और वह राक्षक भयंकर जल वर्षा करता और उसके आंतक से बचने के लिए सभी देवताओ ने मिलकर सोचा की वत्रासुर का वध करना अब जरुरी हो गया है सारे देवता गण देवराज  इंद्र के पास गए और उन्होंने वत्रासुर के वध करने के लिए भगवान् इंद्र देव का आवाहन किया  सभी देवताओ ने सारा वर्तान्त देवराज इंद्र को बताया और फिर देवराज इंद्र और वत्रासुर का प्रलयकारी युद्ध हुआ अंत मैं देवराज इंद्र ने वत्रासुर पर विजयी पायी और वत्रासुर को मारकर वह बारिश के स्वामी बन गए उसके बाद से देवराज इंद्र वर्षा के स्वामी भी कहे जाने लगे  इसलिए देवराज इंद्र को वर्षा को स्वामी भी कहा जाता है