इंद्र वत्रासुर युद्ध 

यह पौराणिक कथा के अनुसार एक  कालकेय नाम का एक  राक्षक  था और सम्पूर्ण धरती और आकाश पर उसका आंतक था और वह राक्षक भयंकर जल वर्षा करता और उसके आंतक से बचने के लिए सभी देवताओ ने मिलकर सोचा की वत्रासुर का वध करना अब जरुरी हो गया है सारे देवता गण देवराज  इंद्र के पास गए और उन्होंने वत्रासुर के वध करने के लिए भगवान् इंद्र देव का आवाहन किया 

सभी देवताओ ने सारा वर्तान्त देवराज इंद्र को बताया और फिर देवराज इंद्र और वत्रासुर का प्रलयकारी युद्ध हुआ अंत मैं देवराज इंद्र ने वत्रासुर पर विजयी पायी और वत्रासुर को मारकर वह बारिश के स्वामी बन गए उसके बाद से देवराज इंद्र वर्षा के स्वामी भी कहे जाने लगे 

इसलिए देवराज इंद्र को वर्षा को स्वामी भी कहा जाता है 


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