भगवान् श्री इंद्र देव के चरित्र और कार्य हिन्दू धर्म मै ३३ करोड़ देवताओं का वरण मिलता है और सभी देवताओ के कार्य अलग अलग है और भगवान् श्री इंद्र देव के जीवन से मनुष्य को शिक्षा मिलती है और भोग से योग की और कैसे चले वैसे तो भगवान् श्री इंद्र देव को देवताओ का राजा माना जाता है वही वर्षा पैदा करते है और वही स्वर्ग पर राज करते है और बही बादलो के देवता है सफ़ेद हाथी पर सवार इंद्र का अस्त्र बज्र है इस वज्र से इंद्र मेघ और विजली को अपने तरीके से संचालित कर के शत्रुओं पर आघात करने की क्षमता रखते है और इंद्र देव आपार शक्तिशाली देव है युद्ध मैं जाने से पहले जो भी प्राणी भगवान् इन्दर देव की पूजा अर्चना करते है वह युद्ध मै हमेशा विजयी बनते है
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सही ज्ञान एक गांव मैं एक चोर रहता था वह चोरी करने मैं निपुण था परन्तु वह किसी भी साधु संत की बातो मैं नहीं आता था एक दिन चोर ने सोचा क्यों न राजा के महल मैं ही हाथ साफ़ कर दिया जाए और वह महल के अंदर घुस गया जैसे ही वह महल के अंदर गया तो उसने देखा की एक बहुत वड़े महात्मा का प्रवचन चल रहा था परन्तु वह महात्मा की बातो मैं नहीं आता था इतना देख के वह वंहा से भागने लगा भागते भागते जैसे ही वह भीड़ के निकट पहुंचा तो वह एक पत्थर के साथ टकरा कर गिर गया तभी महात्मा जी की अव्वाज़ उसके कानो मैं पड़ीं कही झूट नहीं बोलना चाहिए जिसका नमक खाओ उसका कभी बुरा मत करो वह इतना सुन के उठा फिर भी बह चोरी करने महल के अंदर चला गया जैसे ही वह महल के दरवार के निकट पहुंचा तो दरवान ने पूछा कौन हो तुम और महल मैं क्या कर रहे हो ? इतना सुनते हो चोर को महात...
सही ज्ञान देवराज इंद्र और पहाड़ की कहानी एक पौराणिक धार्मिक ग्रन्थ के अनुसार एक जगह पर तीन पहाड़ थेः और वह तीनो एक साथ रहते थे एक बार देवराज इंद्र उनके पास गए और बोला इस क्षेत्र मै कोई नहीं आता और मैं इस क्षेत्र का नाम रखना चाहता हु और मैं चाहता हु की तुम तीनो मैं से किसी एक का नाम रख दू तो पहले पहाड़ ने बोला मैं यह चाहता हु की मैं सबसे ऊँचा दिखाई दू ताकि मैं सब को दूर से दिखाई दू तो दूसरे पहाड़ ने बोला की मुझे हरा भरा कर दीजिये ताकि लोग मेरी और आर्कर्षित हो जाये तीसरे पहाड़ ने बोला की आप मेरी ऊंचाई को समतल कर दीजिये ताकि लोग यंहा पर रह सके और लोग यंहा पर खेती कर के अपना जीवन यापन कर सके देवराज इंद्र ने तीनो पहाड़ो की बात सुन के उस समय वो वंहा से चले गए लेकिन १ वर्ष होने के बाद देवराज इंद्र फिर से लोटे और दे...
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